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Saturday, 3 November 2012

क्यूँ मांगू पति की उमर, मैं तो रही कमाय -


परिहास 
जली कटी देती सुना, महीने में दो चार ।
 तुम तो भूखी एक दिन, सैंयाँ बारम्बार ।
सैंयाँ बारम्बार, तुम्हारे व्रत की माया । 
सौ प्रतिशत अति शुद्ध, प्रेम-विश्वास समाया ।
रविकर फांके खीज, गालियाँ भूख-लटी दे । 
कैसे मांगे दम्भ, रोटियां जली कटी दे ।।


सइयाँ इंगलिश बार में, मजे लूटकर आयँ
छोटी-छोटी बात पर
,सजनी से लड़ जायँ
सजनी से लड़ जायँ
,कहे हैं जली रोटियाँ
आलू का बस झोल
, कहाँ हैं तली बोटियाँ
जब सजनी गुर्राय
,लपक कर पड़ते पइयाँ
मजे लूटकर आयँ
, इंगलिश बार से सइयाँ ||
2.
हँसके काटो चार दिन,मत दिखलाओ तैश
बाकी के  छब्बीस  दिन ,  होगी  प्यारे  ऐश
होगी प्यारे ऐश , दुखों का प्रतिशत कम है
सात जनम का साथ ,रास्ता बड़ा विषम है
पाओगे सुख-धाम ,उन्हीं जुल्फों में फँस के
मत दिखलाओ तैश,चार दिन काटो हँसके ||



सारा यह झूठा प्रपंच,  फैलाई अफवाह ।
रविकर हनुमत भक्त है, चलता सीधी राह ।
चलता सीधी राह, किया मंदिर में दर्शन ।
खाया तनिक प्रसाद, घेर लेते कुछ दुर्जन ।
ठेला ठेली करें, गले पे चाक़ू धारा।
 कपड़ों पर ढरकाय, तमाशा करते सारा ।। 


  1. सॉरी,अधूरा कमेंट उड़ गया था, कृपया इस प्रकार पढ़ें -
    बढ़िया लेक्चर पिलाया, रविकर जी को!
    Reply
  2. वाह ..
    नहले पे दहला
    Reply
  3. मजेदार:)अब रविकर सर के जवाब की प्रतीक्षा है|
    Reply
  4. रोचक कुंडलियाँ ......
    Reply
    1. वाह अब आएगा मज़ा - कोई तो कम नहीं

दीदी-बहना पञ्च हैं, मसला लाया खींच |
हाथ जोड़ रविकर खड़ा, नीची नजरें मींच |
नीची नजरें मींच, मगर बुदबुदा रहा है |
उनकी साड़ी फींच, सका पर नहीं नहा है |
दीदी की क्या बात, ब्याह कर अपने रस्ते |
कहती नहीं उपाय, कि रविकर छूटे सस्ते  ||


वो भी बोली  
क्यूँ मांगू पति की उमर, मैं तो रही कमाय ।
उनकी क्या मुहताज हूँ, काहे रहूँ भुखाय ।
काहे रहूँ भुखाय, बनाते बढ़िया खाना ।
टिफिन बना दें मस्त, बना ऑफिस दीवाना ।
कब से करवा चौथ, नहीं रखते पति मेरे  ।
मारे गर अवकाश, यहाँ होटल बहुतेरे ।। 


  1. @ दीदी-बहना पञ्च ये, मसला लाया खींच..........
    ***************************************
    बीबी से तो बच गये ,दीदी खींचे कान
    हँसकर बहना बोलती ,अरे सुधर शैतान !
    अरे सुधर शैतान ,थाम भाभी का पल्लू
    सँवरेगा दाम्पत्य ,एक दिन हल्लू-हल्लू
    मिल बैठे सुलझाव,मामला बड़ा करीबी
    पाओगे सुखधाम,अगर खुश होगी बीबी ||
  2. दोनों ही जब कर रहे,हैं इनकम जनरेट
    घर में राखें कूक औ'खायें जी! भरपेट
    खायें जी! भरपेट ,हटाएँ मन की हूकें
    चूल्हा जायें भूल, मधुर बाँसुरिया फूकें
    यस-यस है इस पार,उधर है नो-नो,नो-नो
    छत्तीस को श्रीमान्, बनालें तिरसठ दोनों ||
    1. आया ऊंट पहाड़ तले तो दे रहा अब सफाई
      कर्म किए कुछ भी कभी , अब सूझी भक्ताई
      माथे टीका माँड़ कहे , मैं मंदिर जाता हूँ
      खाये छप्पन भोग कहे , तनिक प्रसाद खाता हूँ
      रवि औ अरुण दोनों हैं एक दूजे पर भारी
      दोनों की नोकझोंक लगती है हमको प्यारी .....
  1. दीदी के दरबार में, होय फजीहत मोर |
    आज दोस्त भी छोड़ता, दुश्मन सरिस खखोर |
    दुश्मन सरिस खखोर, जमाया बड़ी-बटोर है |
    अब नहिं कान मरोड़, हाथ में बड़ा जोर है |
    कान पकड़ उठ बैठ, करे रविकर उम्मीदी |
    भौजी को भी जाय, यही समझाएं दीदी ||
कान्ता कर करवा करे, सालो-भर करवाल-


 आभारी है पति-जगत, व्रती-नारि उपकार ।
नतमस्तक हम आज हैं, स्वीकारो उपहार ।।

(महिमा )  
नारीवादी  हस्तियाँ,  होती  क्यूँ  नाराज |
गृह-प्रबंधन इक कला, ताके सदा समाज ||

 मर्द कमाए लाख पण,  करे प्रबंधन-काज |
घर लागे नारी  बिना,  डूबा  हुआ  जहाज  ||
 

 (शुभकामनाएं)
कर करवल करवा सजा,  कर सोलह श्रृंगार |
माँ-गौरी आशीष दे,  सदा बढ़े शुभ प्यार ||
   करवल=काँसा मिली चाँदी
कृष्ण-कार्तिक चौथ की,  महिमा  अपरम्पार |
क्षमा सहित मन की कहूँ,  लागूँ  राज- कुमार ||
Karwa Chauth
(हास-परिहास)
कान्ता कर करवा करे, सालो-भर करवाल |
  सजी कन्त के वास्ते, बदली-बदली  चाल ||
  करवाल=तलवार  
करवा संग करवालिका,  बनी बालिका वीर |
शक्ति  पाय  दुर्गा   बनी,  मनुवा  होय  अधीर ||
करवालिका = छोटी गदा / बेलन जैसी भी हो सकती है क्या ?
 शुक्ल भाद्रपद चौथ का, झूठा लगा कलंक |
सत्य मानकर के रहें,  बेगम सदा सशंक ||

  लिया मराठा राज जस, चौथ नहीं पूर्णांश  |
चौथी से ही चल रहा,  अब क्या लेना चांस ??

5 comments:

  1. आपकी कुंडलियां
    ज्यों रसभरी जलेबियां।

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  2. बहुत सुन्दर और शानदार काव्यमय टिप्पणियाँ!
    एक बात और भी-
    पति तो बहुत मिल जायेंगे मगर नौकरी मिलना दुर्लभ है।
    इस लिए पति की लम्बी उमर माँने का क्या लाभ!

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  3. आनंद दायक रोचक कुंडलियाँ....

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  4. waah ...waah ....majedar prastuti...

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