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Thursday, 8 November 2012

करलो प्यारे पान, पिए रविकर विष खारा

 
 सकारात्मक पक्ष से, कभी नहीं हो पीर |
नकारात्मक छोड़िये, रखिये मन में धीर |

रखिये मन में धीर, जलधि-मन मंथन करके |
देह नहीं जल जाय, मिले घट अमृत भरके |

करलो प्यारे पान, पिए रविकर विष खारा |
हो जग का कल्याण, सही सिद्धांत सकारा ||


कातिल क्या तिल तिल मरे, तमतमाय तुल जाय ।
हँस हठात हत्या  करे, रहे ऐंठ बल खाय ।
 
रहे ऐंठ बल खाय, नहीं अफ़सोस तनिक है ।
कहीं अगर पकड़ाय, डाक्टर लिखता सिक है ।

मिले जमानत ठीक, नहीं तो अन्दर हिल मिल ।
खा विरयानी मटन, मौज में पूरा कातिल ।।

9 comments:

  1. बहुत सुंदर और सटीक कुण्डलियाँ...

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  2. 'जलधि-मन मंथन करके....'
    --- मंथन का अर्थ है सकारात्मक--नकारात्मक--गुणात्मक सभी पहलुओं पर गौर करना....

    कभी नहीं हो पीर, वो कैसे पीर को जाने,
    जाने बिन, बेपीर , पीर कैसे सनमाने |
    हर पहलू तू जान, नकारा या साकारा ,
    पीर जगत की जान,जग का प्यारा हो तभी ||

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  3. छोटी सी है जिन्दगी, करते क्यों अभिमान।
    सुख-दुख दोनों में रहो, प्रतिपल एक समान।।
    --
    अमृत भी है सिन्धु में, क्यों करते विषपान।
    मानव हो मानव रहों, बनो न देव महान।।

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  4. बहुत सुंदर और सटीक- मिले जमानत ठीक, नहीं तो अन्दर हिल मिल ।
    खा विरयानी मटन, मौज में पूरा कातिल ।।

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  5. परहित सरस धर्म नहीं भाय ,बार बार कहे रविकर कवि राय

    करलो प्यारे पान, पिए रविकर विष खारा

    सकारात्मक पक्ष से, कभी नहीं हो पीर |
    नकारात्मक छोड़िये, रखिये मन में धीर |

    रखिये मन में धीर, जलधि-मन मंथन करके |
    देह नहीं जल जाय, मिले घट अमृत भरके |

    करलो प्यारे पान, पिए रविकर विष खारा |
    हो जग का कल्याण, सही सिद्धांत सकारा ||

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  6. बहुत अच्छा है रविकर जी ,तभी तो विष की कड़ुआहट आपके लिये सिर्फ़ खारेपन तक सीमित रही.

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  7. RAVIKAR JI, BAHUT SUNDAR KUNDALIYA...."KAR LE HM VISHPAN AJ,BAN JAYE BHOLE SHIV SHANKAR,,,,DUNIYA KI PIDA KO HAR LE,SHIV KO FIR DHARTI PAR LA DE...


    DEEPAWALI KI HARDIK SHUBHKAMNAYE

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