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Saturday, 24 November 2012

नारि धर्म अवहेलना, तुकबंदी बद्जात -



(मिली टिप्पणी का भावानुवाद) 

 मूली हो किस खेत की, क्या रविकर औकात ?
नारि धर्म अवहेलना, तुकबंदी  बद्जात 

तुकबंदी बद्जात, फटाफट छान जलेबी ।
  नाग-कुंडली मार, डरा नहिं बाबा बेबी ।

ब्लॉग-वर्ल्ड अभिजात, हकाले ऊल-जुलूली ।
उटपटांग कुल कथ्य, शिल्प बेहद मामूली ।। 
[jelebi[5].jpg]




 तीखी मिर्ची असम की, खाय रहा पंजाब ।
रविकर यूँ मत मुंह लगा, ज्वलनशील तेज़ाब ।
ज्वलनशील तेज़ाब, तनिक भी गर चख लेगा ।
सी सी सू सू आह, गुलगुला गुड़ अखरेगा ।
जले सवेरे तलक, देहरी रग रग चीखी । 
बवासीर हो जाय, फिरा मुँह मिर्ची तीखी ।।
मिर्ची क्यों होती है इतनी तीखी?
 

4 comments:

  1. हा हा हा ..आपका भी जवाब नहीं।

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  2. कल 09/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत खूब रविकर जी.....
    :-)

    सादर
    अनु

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  4. बहुत बढ़ियाँ...
    :-)

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