Follow by Email

Thursday, 26 July 2012

संतोष त्रिवेदी & रविकर : जनसन्देश टाइम्स पर-1


12 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (28-07-2012) के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
    टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
    मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
    शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति रविकर जी की ..कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    ReplyDelete
  3. बृहस्पतिवार, 26 जुलाई 2012
    food myths & facts
    खाद्यों से जुड़े मिथ और यथार्थ



    लहसुन की दुर्गंध को,दूर भगाता सौफ
    मच्छर भी है भागते,खाते इससे खौफ,,,,,,............dheerendra
    पोषक तत्व बचाइये, भूलो सज्जा स्वाद |
    चिकनाई शक्कर बढे, बिगड़े भला सलाद |
    लहसुन खाने से नहीं, मच्छर भागें पार्थ |
    माशूका खिसके मगर, रविकर यही यथार्थ ||
    अम्ल अमीनो सोडियम, दिल को रखे दुरुस्त |
    पोटेशियम तरबूज से, मिले यार इक मुश्त ||
    अम्ल अमीनो सोडियम, दिल को रखे दुरुस्त |
    पोटेशियम तरबूज से, मिले यार इक मुश्त ||-----------रविकर फैजाबादीसोच समझ के खाईए
    रहना है तंदरुस्त
    वरना जीवन की गति
    हो जाएगी सुस्त...।................surenderpal vaidya

    ReplyDelete
  4. रविकर जी ,धीरेंद्र्जी,सुरेन्द्र पाल वैद्य जी ,आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया इस पोस्ट को सजाने ,सारगर्भित बनाने के लिए .

    ReplyDelete
  5. करेला और नीम
    दोनो साथ साथ
    वाह मजा आ गया !

    ReplyDelete
  6. बहुत बढ़िया...
    सादर।

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  8. बहुत ही दमदार प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  9. क्या बात है रविकर जी ,मजा न आ गया ,कतई लठ्ठ गाढ दिए भाई आज तो ..बढिया व्यंग्य संतोष त्रिवेदी जी का .

    ..कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    ReplyDelete