Follow by Email

Sunday, 24 November 2013

दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |                                             
निबट सके जो ठीक से, राजा हो या रंक |

राजा हो या रंक, बढ़ी कितनी घटनाएं-
जब तब मारे डंक, इन्हें जल्दी निबटाएं |

तंतु तंतु में *तोड़, बड़े संकट में तन्त्रा |
कैसे रक्षण होय, देव कुछ दे दो मन्त्रा -

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (25-11-2013) को "उपेक्षा का दंश" (चर्चा मंचःअंक-1441) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर .. लेकिन कितने भी मंत्रालय बना लो कुछ नहीं होने वाला , जब तक प्रत्येक व्यक्ति , व्यक्ति विशेष के स्तर पर चरित्र अच्छा नहीं रखे बरते हालत नहीं सुधरने वाला .. आभार ..

    ReplyDelete