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Friday, 8 November 2013

सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान -

मंशा मनसूबे सही, लेकिन गलत बयान |
सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान |

खुलती पाक दुकान, सजा दे मंदिर मस्जिद |
लेती माल खरीद, कई सरकारें संविद |

नीर क्षीर अविवेक, बने जब कौआ हंसा |
रहे गधे अब रेक, जगाना इनकी मंशा ||


मंशा पर करते खड़े, क्यूँ आयोग सवाल । 
भल-मन-साहत देखिये, देख लीजिये चाल । 

देख लीजिये चाल, मिले शाबाशी पुत्तर । 
होता मुन्ना पास,चार पन्ने का उत्तर । 

पुन: मुज्जफ्फर नगर, करूँ क्यूँकर अनुशंसा ।
उधर इरादा पाक, इधर इनकी जो मंशा ॥ 

11 comments:

  1. बहुत सुंदर ! आ.रविकर जी.

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  2. सदैव की भाँति सुन्दर अभिव्यक्ति। आभार।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (10-11-2013) को सत्यमेव जयते’" (चर्चामंच : चर्चा अंक : 1425) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. वाह ! बहुत खूब !

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  5. सुन्दर प्रस्तुति

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  6. मीठे कटाक्ष,मगर तीखे भी.

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  7. खुलती पाक दुकान, सजा दे मंदिर मस्जिद |
    लेती माल खरीद, कई सरकारें संविद |

    चलती खूब दूकान यहाँ पर ,आतंकी हैं ढ़ेर
    नेताओं से हो रही दिनोरात देखो अब मुठभेड़ .

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  8. खुलती पाक दुकान, सजा दे मंदिर मस्जिद |
    लेती माल खरीद, कई सरकारें संविद |

    चलती खूब दूकान यहाँ पर ,आतंकी हैं ढ़ेर
    नेताओं से हो रही दिनोरात देखो अब मुठभेड़ .

    सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान -
    मंशा मनसूबे सही, लेकिन गलत बयान |
    सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान |
    खुलती पाक दुकान, सजा दे मंदिर मस्जिद |
    लेती माल खरीद, कई सरकारें संविद |
    नीर क्षीर अविवेक, बने जब कौआ हंसा |
    रहे गधे अब रेक, जगाना इनकी मंशा...
    रविकर की कुण्डलियाँ

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