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Wednesday, 6 November 2013

तक्षशिला में ढूंढते, मूर्ख आज तक खोट -

लगे पलीते दर्जनों, होंय सतत विस्फोट |
तक्षशिला में ढूंढते, मूर्ख आज तक खोट |

मूर्ख आज तक खोट, लड़े थे चन्द्रगुप्त-रण |
पकड़ शब्दश: तथ्य, भूल ना पाते भाषण |

कह रविकर एहसास, सभा भगदड़ बिन बीते |
भूल परिस्थित-जन्य, अगर हों लगे पलीते ||

घटनाएं जब यकबयक, होंय खड़ी मुँह फाड़ |
असमंजस में आदमी, काँप जाय दिल-हाड़ |

काँप जाय दिल-हाड़, बचाना लेकिन जीवन |
आये  लाखों लोग, जहाँ सुनने को भाषण |

कर तथ्यों की बात, गलतियां ढूंढे पटना |
सह मोदी आघात, सँभाले प्रति-दुर्घटना ||


खीरा-ककड़ी सा चखें, हम गोली बारूद |

पचा नहीं पटना सका, पर अपने अमरूद |

पर अपने अमरूद, जतन से पेड़ लगाये |
लिया पाक से बीज, खाद ढाका से लाये |

बिछा पड़ा बारूद, उसी पर बैठ कबीरा |
बने नीति का ईश, जमा कर रखे जखीरा ||

Friday, 25 October 2013

*कसंग्रेस भी आज, करें दंगों का धंधा

अन्धा बन्दर बोलता, आंके बन्दर मूक |
गूंगा बन्दर पकड़ ले, हर भाषण की चूक |

हर भाषण की चूक, हूक गांधी के दिल में  |
मार राख पर फूंक, लगाते लौ मंजिल में  |

*कसंग्रेस भी आज, करें दंगों का धंधा |
मत दे मत-तलवार, बनेगा बन्दर अन्धा ||

* जैसा राहुल के इंदौर के कार्यक्रम के पोडियम पर लिखा था-


नक्सल आतंकी कहीं, फिर ना जायें कोप |
शान्ति-भंग रैली करे, सत्ता का आरोप |

सत्ता का आरोप, निभाता नातेदारी |
विस्फोटक पर बैठ, मस्त सरकार बिहारी |

दशकों का अभ्यास, सँभाले रक्खा भटकल |
रैली से आतंक, इलेक्शन से हैं नक्सल ||
पारा-पारी ब्लास्ट, महज छह जान गई है-

रविकर-पुंज
*फेलिन करता फेल जब, मनसूबे आतंक |
बिना आर.डी.एक्स के, हल्का होता डंक |

हल्का होता डंक, सुपारी फेल हुई है |
पारा-पारी ब्लास्ट, महज छह जान गई है |

कृपा ईश की पाय, कहाँ फिर मोदी मरता -
आई एस आई चाल, फेल यह फेलिन करता ||

WEDNESDAY, 30 OCTOBER 2013

देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान-

रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु
देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान |
अभी अभी जो दिया था, तगड़ा बड़ा बयान |

तगड़ा बड़ा बयान, प्रथम शौचालय आये |
पीछे देवस्थान, गाँव आदर्श बनाये |

मानव-बम फट जाय, और बच जाता नेता |
शौचालय जय जयतु, बधाई रविकर देता ||


5 comments:

  1. लौह-पुरुष तब बाप, आज अडवाणी बोले-
    ) कम्युनल नेहरू कहें, जब निजाम-संताप |
    रिश्ते में लगने लगे, लौह-पुरुष तब बाप...
    --
    कीचड़ में अरविन्द, कहाँ शीला-अर सीला-
    अरसीला अरविन्द *अर, अथ शीला सरकार |
    दृष्टि-बुरी जब कमल पर, होगा बंटाधार |
    होगा बंटाधार, खेल फिर झारखण्ड सा |
    जन त्रिशंकु आदेश, खेल खेलेगा पैसा...
    रविकर की कुण्डलियाँ

    कौन है सेकुलर कौन है कम्युनल, रविकर खोले पोल ,

    पटेल बस सरदार था ,बात कहे सब खोल।

    बात पते की बोल ,....... दिखावे रोज़ तमाशे

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  2. लगे पलीते दर्जनों, होंय सतत विस्फोट |
    तक्षशिला में ढूंढते, मूर्ख आज तक खोट |

    अति सुन्दर .

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