Follow by Email

Friday, 22 November 2013

नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग-

यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं?

DR. ANWER JAMAL 




(1)
आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

साथ फूस के आग, जागते रहना बन्दे |
हुई अगर जो चूक, झेल क़ानूनी फंदे |

जिनका किया शिकार, आज वे सारे जागे |
मिला जिन्हें था लाभ, नहीं वे आयें आगे ||



बंगारू कि आत्मा, होती आज प्रसन्न |
सन्न तहलका दीखता, झटका करे विपन्न |

झटका करे विपन्न, सताया है कितनों को |
लगी उन्हीं कि हाय, हाय अब माथा ठोको |

गोया गोवा तेज, चढ़ी थी जालिम दारू |
रंग दे डर्टी पेज, देखते हैं बंगारू ||
यौनोत्पीड़न के लिए, कुर्सी छोड़े आप |

कुर्सी छोड़े आप, मात्र छह महिना काहे |
सहकर्मी चुपचाप, बॉस जो उसका चाहे |

लेता आज संभाल, देख लेता कल कल का |
तरुण तेज ले पाल, सेक्स से मचे तहलका ||

7 comments:

  1. (1)
    आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
    नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

    साथ फूस के आग, जागते रहना बन्दे |
    हुई अगर जो चूक, झेल क़ानूनी फंदे |

    जिनका किया शिकार, आज वे सारे जागे |
    मिला जिन्हें था लाभ, नहीं वे आयें आगे ||

    बहुत खूब रविकर भाई ,ला -ज़वाब .

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (23-11-2013) "क्या लिखते रहते हो यूँ ही" “चर्चामंच : चर्चा अंक - 1438” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    ReplyDelete
  3. सुन्दर विचारों का प्रवाह
    नई पोस्ट -विशालाक्षा

    ReplyDelete
  4. आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
    नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

    waah...

    ReplyDelete