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Wednesday, 10 October 2012

नव-कथा (60 शब्द): सब विकलांग ख़तम-पैसा हजम ।।


निरवंशी नवाब : नव-कथा (100 शब्द)

नजफगढ़ के नवाब गुलाब गोदी गुरिल्ला युद्ध में मारे गए । शहजादी परीजाद की शादी रुहेले सरदार रोबे खान से हुई ही थी कि परीजाद की ननद की घोड़े से गिरकर मौत हो गई उसका इकलौता देवर भी पानीपत के मैदान में डूब मरासरदार के अब्बू की रहस्यमय-परिस्थिति में मौत हो चुकी है -अब सास एवं पति के साथ वह अपनी रियासत की उन्नति में लगी हुई है -दिन हजार गुनी, रात लाख गुनी |  
शायद नजफ़गढ़ पर भी शहजादी की नीयत खराब है- तभी तो 45 साल की उम्र में भी इसका भाई शहजादा असलीम कुँवारा   है -  
कुँवारे के भांजा-भांजी ही मारेंगे भाँजी-




दुर्मिल सवैया का अभ्यास -

सलमान मियाँ अब जान दिया, जब लाख करोड़ मिला विकलांगी ।
अब जाकिर सा शुभ नाम बिका, खुरशीद दगा दबता सरवांगी ।
वडरा कचरा कल झेल गया, अखरा अपना लफड़ा एकांगी ।
असहाय शरीर रहा अकुलाय चुरा सब खाय गया हतभागी ।।

सही समय पर सही फैसला |
मत्त गयन्द सवैया का अभ्यास --
सीख रही जब वक्त सही तब निर्णय ले अपनी यह माया |
काजिन राम सिखाय गए कछु कौशल,  पाय गई सरमाया |
देश जले जब खूब खले, सरकार तपे डटके भरमाया |
कोरट से जब छूट नहीं तब वापस हाथ हटा भहराया |



वजीर सलमान अपनी जान अपनी जमीदारिन पर न्यौछावर करने का जज्बा रखता है-
उसने दस साल पहले अपने नाना जाकिर के नाम पर एक अस्पताल खोला था विकलांगों के लिए -
जमींदार सरदार खान ने एक बोरा अशर्फियाँ दान दे दी इस भले काम के लिए- अब पता चला है कि उसकी जमीदारी में - 
सब विकलांग ख़तम-पैसा हजम ।।
 



5 comments:

  1. @ अधकचरा में बात बिगड़ रही है ... एक बार फिर ध्यान दें

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  2. बहुत उम्दा है, मगर चहक कम है इस पोस्ट में!

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  3. रविकर जी, मेरी तरफ से मत्तगयन्द

    नाव सवार करा कर लूट करे गर नौकर ही मुरशीदा।
    घोर छिछोर नहीं इससे, तुलना करके समझो बकरीदा।
    ताक रहे विकलाग सभी दुःख दूर करे लुइ से उममीदा।
    'जाकिर' नाम डुबो कर तैर गये सलमान मियाँ खुरशीदा।

    मुर्शीदा = गाइड, निर्देशक

    [सात भकार मिला गुरु दो बनता शुभ मत्त गयन्द सवैया।]

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    Replies
    1. सही समय पर सही फैसला |
      मत्त गयन्द सवैया का अभ्यास --
      सीख रही जब वक्त सही तब निर्णय ले अपनी यह माया |
      काजिन राम सिखाय गए कछु कौशल, पाय गई सरमाया |
      देश जले जब खूब खले, सरकार तपे डटके भरमाया |
      कोरट से जब छूट नहीं तब वापस हाथ हटा भहराया |

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